एमडी अग्रवाल अब गावों में भी खोलेंगे बैंकमैं जयपुर से हूं..दादाजी स्वतंत्रता सेनानी थे मैं और पापा आरएसईबी में इंजीनियर। परिवार के अन्य लोग भी अच्छी नौकरियों में थे। शुरू में पढ़ाई में मन नहीं लगता था। आठवीं में फेल भी हुआ। परिवार वालों की डांट पड़ी तो पढ़ाई में ध्यान देना शुरू किया। इसके बाद कॉमर्स कॉलेज से ग्रेजुएशन किया। 1994 में सीए परीक्षा पास की। फाइनल परीक्षा में ऑल इंडिया स्तर पर 39वीं रेंक मिली। आईडीबीआई बैंक, हिंदुस्तान लीवर, बेंगलुरु रिफाइनरी समेत देश की नामी कंपनियों समेत कई शहरों से नौकरी के ऑफर मिले। नौकरी के लिए कई शहर गया मगर दो-तीन दिन से ज्यादा रुक नहीं सका। कुल मिलाकर 10 |दिन नौकरी की...मन नहीं लगा। खुद का बिजनेस करने की इच्छा थी लेकिन पूंजी नहीं थी। चाचा जी की कंपनी से जड़ा। 1995 से 2002 के बीच कई बिजनेस किए। इस बीच बहन की बीमारी के चलते इंग्लैंड चला गया। उन्होंने कहा जिसमें | महारत हो, वह काम करो। सीए था, फाइनेंस की समझ थी और यही वो टर्निंग पाइंट था, सब छोड़कर फाइनेंस के बिजनेस में आ गया। 2003 से 2008 तक एचडीएफसी बैंक के साथ चैनल । पार्टनर के रूप में काम किया। एयू फाइनेंस समेत तीन-चार फाइनेंस कंपनियां खोली। जयपुर के बिजनेसमैनों का विश्वास जीता, कई निवेशकों का पैसा मिला। छोटे कारोबारियों को लोन देना शुरू किया। 2014 में देश में स्माल फाइनेंस बैंक खोलने का फैसला किया गया। हमने भी लाइसस का आवेदन किया, मिल भी गया। इत्तेफाक यह कि 1 अप्रैल 2017 को एसबीबीजे का एसबीआई में विलय हुआ और 19 अप्रैल को एयू स्माल फाइनेंस बैंक की शुरुआत हुई।
ग्राहक के नाते परेशानियां समझी,अपना मॉडल बनाया
बैंकों में पैसा जमा कराना-निकालना और बैंकिंग कार्यों के लिए बहुत जाना पड़ता था। ग्राहक के नाते परेशानियों को समझा और अपना बिजनेस मॉडल बनाया। एयू बैंक में खाता खोलने के लिए अंगूठे का निशान लिया जाता है, देश में कहीं भी टचपाइंट में ग्राहक केवल अंगूठा लगाकर भी पैसा निकाल सकता है। कैश जमा कराने के लिए पर्ची नहीं भरनी पड़ती है, यह जिम्मेदारी कर्मचारी की है। लोन पर हर महीने ब्याज लिया जाता है तो जमा पर ब्याज क्यों नहीं। इस नई सोच के साथ ग्राहकों को बचत खातों पर हर महीने ब्याज देने की पहल की। अभी राजस्थान के बहुत से इलाकों में बैंकिंग सेवाएं नहीं हैं लेकिन 5 साल में 2000 से अधिक आबादी वाले हर गांव-कस्बे में एयू बैंक की मौजूदगी होगी।
मैं जयपुर से हूं..दादाजी स्वतंत्रता सेनानी थे मैं और पापा आरएसईबी में इंजीनियर। परिवार के अन्य लोग भी अच्छी नौकरियों में थे। शुरू में पढ़ाई में मन नहीं लगता था। आठवीं में फेल भी हुआ। परिवार वालों की डांट पड़ी तो पढ़ाई में ध्यान देना शुरू किया। इसके बाद कॉमर्स कॉलेज से ग्रेजुएशन किया। 1994 में सीए परीक्षा पास की। फाइनल परीक्षा में ऑल इंडिया स्तर पर 39वीं रेंक मिली। आईडीबीआई बैंक, हिंदुस्तान लीवर, बेंगलुरु रिफाइनरी समेत देश की नामी कंपनियों समेत कई शहरों से नौकरी के ऑफर मिले। नौकरी के लिए कई शहर गया मगर दो-तीन दिन से ज्यादा रुक नहीं सका। कुल मिलाकर 10 |दिन नौकरी की...मन नहीं लगा। खुद का बिजनेस करने की इच्छा थी लेकिन पूंजी नहीं थी। चाचा जी की कंपनी से जड़ा। 1995 से 2002 के बीच कई बिजनेस किए। इस बीच बहन की बीमारी के चलते इंग्लैंड चला गया। उन्होंने कहा जिसमें | महारत हो, वह काम करो। सीए था, फाइनेंस की समझ थी और यही वो टर्निंग पाइंट था, सब छोड़कर फाइनेंस के बिजनेस में आ गया। 2003 से 2008 तक एचडीएफसी बैंक के साथ चैनल । पार्टनर के रूप में काम किया। एयू फाइनेंस समेत तीन-चार फाइनेंस कंपनियां खोली। जयपुर के बिजनेसमैनों का विश्वास जीता, कई निवेशकों का पैसा मिला। छोटे कारोबारियों को लोन देना शुरू किया। 2014 में देश में स्माल फाइनेंस बैंक खोलने का फैसला किया गया। हमने भी लाइसस का आवेदन किया, मिल भी गया। इत्तेफाक यह कि 1 अप्रैल 2017 को एसबीबीजे का एसबीआई में विलय हुआ और 19 अप्रैल को एयू स्माल फाइनेंस बैंक की शुरुआत हुई।
ग्राहक के नाते परेशानियां समझी,अपना मॉडल बनाया
बैंकों में पैसा जमा कराना-निकालना और बैंकिंग कार्यों के लिए बहुत जाना पड़ता था। ग्राहक के नाते परेशानियों को समझा और अपना बिजनेस मॉडल बनाया। एयू बैंक में खाता खोलने के लिए अंगूठे का निशान लिया जाता है, देश में कहीं भी टचपाइंट में ग्राहक केवल अंगूठा लगाकर भी पैसा निकाल सकता है। कैश जमा कराने के लिए पर्ची नहीं भरनी पड़ती है, यह जिम्मेदारी कर्मचारी की है। लोन पर हर महीने ब्याज लिया जाता है तो जमा पर ब्याज क्यों नहीं। इस नई सोच के साथ ग्राहकों को बचत खातों पर हर महीने ब्याज देने की पहल की। अभी राजस्थान के बहुत से इलाकों में बैंकिंग सेवाएं नहीं हैं लेकिन 5 साल में 2000 से अधिक आबादी वाले हर गांव-कस्बे में एयू बैंक की मौजूदगी होगी।

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