समोसे का साम्राज्य पूरे भारत में फैला हुआ है। उत्तरी क्षेत्र में मसालेदार 7 आलू की पीठी से भरे गरमा-गरम समोसे ना जाने कब से चाय का साथ निभाते आ रहे हैं। बंगाल में इसे सिंगाढा कहते हैं और इसके भीतर आलुओं को उबालने के बाद कुचलकर नहीं, बल्कि काटकर व छौंककर ही भरा जाता है। बंगाल में समोसे में फूलगोभी का इस्तेमाल भी किया जाता रहा है। औपनिवेशिक दौर में कभी-कभार इसमें उबले अंडे भी चखने को मिलते थे। दक्खिन के औरंगाबाद में सामिष (कीमे वाले) समोसे बनाए जाते हैं। राजधानी दिल्ली में एक रेस्तरां के भीमकाय कीमे वाले समोसे मशहूर हैं, जो नाश्ते के लिए नहीं, बल्कि दोपहर के खाने की सामग्री के रूप में परोसे जाते हैं। दूसरे छोर पर नन्हे कॉकटेल समोसे हैं, जिन्हें एक निवाले में ही हजम किया जा सकता है। उनमें आमतौर पर ताजी हरी मटर भरी जाती हैं तो मशरूम भी। आजकल सेहत के लिए फ़िक्रमंद लोग समोसे से परहेज करने लगे हैं। इस बारे में शेफ मनजीत गिल का मानना है कि समोसा संतुलित व संपूर्ण आहार है। मनजीत का मानना है कि अगर कारीगर कुशल है तो उसके हाथ से बने समोसों में रत्ती भर भी तेल या चिकनाई शेष नहीं रहेगी। आमतौर...
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